जानिए – फ़िनलैंड के वैज्ञानिक हवा से कैसे बना रहे हैं प्रोटीन

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फ़िनलैंड के वैज्ञानिक हवा से प्रोटीन बना रहे हैं. उनका दावा है कि इस दशक में ये सोयाबीन के दामों को टक्कर देगा.

प्रोटीन का उत्पादन मिट्टी के बैक्टीरिया से होता है जो बिजली के ज़रिए पानी से अलग हुए हाइड्रोजन से बनता है.

शोधकर्ताओं का कहना है कि अगर बिजली सौर या हवा की ऊर्जा से बनती है तो ये खाना बनाने में ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन शून्य के बराबर होगा.

अगर उनका सपना सच होता है तो खेती से जुड़ी कई मुश्किलें सुलझाने में दुनिया को काफ़ी मदद मिल सकती है.जब मैं बीते साल हेल्सिंकी स्थित सोलर फूड के प्लांट गया तो शोधकर्ता इसके लिए फंड जुटा रहे थे.

अब उनका कहना है कि उन्होंने क़रीब 5.5 मिलियन यूरो का निवेश पाने की राह बना ली है. उनका अनुमान है कि बिजली की क़ीमत को देखते हुए इस दशक के अंत तक या साल 2025 तक इसकी लागत भी सोया के उत्पादन में होने वाले खर्च के आसपास होगी.

उन्होंने बताया कि ये आइडिया मूल रूप से स्पेस इंडस्ट्री के लिए साल 1960 के दशक में आया था.

उन्होंने माना कि उनके प्लांट का काम कुछ धीमा चल रहा है लेकिन वो कहते हैं कि इसे 2022 तक तैयार कर लिया जाएगा. निवेश का पूरा निर्णय साल 2023 में आएगा और सब कुछ योजना के मुताबिक रहा तो पहली फैक्ट्री साल 2025 में शुरू हो जाएगी.

एक बार हम रिएक्टरों को जोड़कर पहले एक जैसे कारखाने को बड़े पैमाने पर बनाते हैं. हवा और सौर ऊर्जा जैसी अन्य स्वच्छ तकनीक में बड़े सुधारों को भी ध्यान में रखते हैं. हमें लगता है कि हम 2025 तक उत्पादन के मामले में सोया को टक्कर दे सकते हैं.

सॉलेन बनाने के लिए पानी से इलेक्ट्रोलिसिस के ज़रिए हाइड्रोजन को अलग किया जाता है. हाइड्रोजन, हवा से ली गई कार्बन डाइऑक्साइड और खनिज पदार्थ बैक्टीरिया को खिलाए जाते हैं, जिससे प्रोटीन बनता है.

वो कहते हैं कि सबसे अहम फैक्टर है बिजली की कीमत. फर्म को उम्मीद है कि जैसे-जैसे नवीकरणीय ऊर्जा के स्रोत मिलेंगे, इसकी कीमत कम होती जाएगी.

इस तकनीक की प्रगति देखकर पर्यावरण कैंपेनर जॉर्ज मॉनबिओ ने भी सराहना की है. जॉर्ज धरती पर भविष्य को लेकर चिंता जताते हैं लेकिन वो यह भी कहते हैं कि सौर ऊर्जा की मदद से बनने वाले खाने से उन्हें उम्मीद है.

अगर चीज़ें प्लान के मुताबिक रहीं, जो कि लग रही हैं, दुनिया में प्रोटीन उत्पादन की मांग और आपूर्ति को अनुमानित वक़्त से सालों पहले पूरा किया जा सकता है.

लेकिन, ये उन तमाम सिंथेसाइज़्ड खानों के प्रोजेक्ट में से एक है जो भविष्य में बतौर विकल्प उपलब्ध हो सकते हैं.

फर्म के सीईओ पासी वैनिक्का ने यूके की क्रैनफ़ील्ड यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की है और फिनलैंड की लप्पीनरांटा यूनिवर्सिटी में पढ़ाते हैं.

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