टेकहोम सैलरी पर विचार कर रही मोदी सरकार : नौकरी करने वाले युवाओं और महिलाओं के लिए बड़ा प्लान

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मोदी सरकार नौकरी करने वाले युवाओं और महिलाओं को ज्यादा टेकहोम सैलरी देने पर विचार कर रही है। कामकाजी महिलाओं, दिव्यांग कर्मचारियों और 25 से 35 साल उम्र के युवा कर्मचारियों को अपने भविष्य निधि में योगदान को 2 से 3 प्रतिशत कटौती करने की इजाजत दी जा सकती है।

एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने बताया कि पीएफ योगदान में कटौती का नियम सभी कर्मचारियों के लिए लागू नहीं होगा। इस नियम के तहत वहीं कर्मचारी आएंगे जो कुछ मानकों को पूरा करेंगे। अधिकारी ने कहा, “यह सबके लिए नहीं होगा। इसे श्रमिकों के कुछ सीमित वर्ग के लिए अनुमति दी जाएगी।” मापदंड तय करने के लिए चर्चा हो रही है। इसमें कामकाजी महिलाओं और दिव्यांग कर्मचारियों को शामिल किया जा सकता है।

क्या होती है सीटीसी सैलरी, जानिए डीटेल में

एक कंपनी आप पर जितना भी खर्च करती है उस पूरी रकम को कॉस्ट टू कंपनी कहा जाता है। एक साल में आपके ऊपर कंपनी का जितना भी खर्च होता है, वह सीटीसी है। इसमें सिर्फ सैलरी ही शामिल नहीं होती है। इसमें अन्य सुविधाएं भी शामिल होती हैं जैसे कैब, खाना और रहने की सुविधा आदि।

सीधा लाभ
बेसिक सैलरी, महंगाई भत्ता (डीआरए), परिवहन भत्ता, मकान किराया (एचआरए), चिकित्सा भत्ता, छुट्टी यात्रा भत्ता (एलटीए), गाड़ी भत्ता, टेलिफोन/मोबाइल फोन भत्ता, बोनस या अन्य लाभ, किसी शहर के लिए खास भत्ता

प्रत्यक्ष लाभ
ब्याज मुक्त लोन, खाने का कूपन या सब्सिडी पर खाना, आवास, कंपनी के द्वारा हर साल चिकित्सा/जीवन बीमा प्रीमियम का भुगतान, आयकर बचत

बचत अंशदान
इसके अलावा सेवानिवृत्त होने पर मिलने वाली राशि, पीएफ, ग्रैच्युटी आदि भी एंप्लॉयी को मिलती है। ये सारी चीजें सीटीसी में ही शामिल होती है।

नेट सैलरी क्या होती है?
नेट सैलरी को टेक होम पे या सैलरी इन हैंड भी बोलते हैं। आसान शब्दों में यूं समझ लें कि यह वह पैसा होता है जो हर महीने आपको मिलता है। टैक्स आदि कटने के बाद यह रकम आपके हाथ में आती है।

एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने बताया कि पीएफ योगदान में कटौती का नियम सभी कर्मचारियों के लिए लागू नहीं होगा। इस नियम के तहत वहीं कर्मचारी आएंगे जो कुछ मानकों को पूरा करेंगे। अधिकारी ने कहा, “यह सबके लिए नहीं होगा। इसे श्रमिकों के कुछ सीमित वर्ग के लिए अनुमति दी जाएगी।” मापदंड तय करने के लिए चर्चा हो रही है। इसमें कामकाजी महिलाओं और दिव्यांग कर्मचारियों को शामिल किया जा सकता है।

 

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