आप भी जान लो 26 January के बारे में ये खास 12 बाते

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२६ जनवरी यानि के गणतंत्र दिवस जिस को लेकर आज भी लोगों में उत्साह की कोई कमी नहीं दिखती।

हर व्यक्ति ने बचपन में गणतंत्र दिवस पर निबन्ध जरुर लिखा होगा और आज भी विद्यालयों में यह परंपरा कायम है और यह हमारी अगली पीढ़ी को भारत की गौरवगाथा और देश के अदम्य साहस को समझाने में सक्षम भी है ।

बाज़ार में गुलज़ार तिरंगे से लेकर घरों में अलग -अलग माध्यम से देखी जाने वाली परेड और झांकियां जिनकी आज की पीढ़ी भी कायल है।

गणतंत्र दिवस हमारा राष्ट्रीय पर्व है यह हर साल 26 जनवरी को मनाया जाता है। इस दिन भारत का संविधान लागू हुआ था जिसका निर्माण बाबा साहब भीम राव अंबेडकर ने किया था। यूं तो यह पर्व पूरे देश में हर्षोउल्लास से मनाया जाता है लेकिन राजधानी दिल्ली में इसका अलग ही रंग देखे को मिलता है। राजधानी दिल्ली के इंडिया गेट पर भव्य झांकी और सैन्य टुकड़ियों की परेड एक अलग ही समा बांध देती हैं

गणतंत्र दिवस के रूप में 26 जनवरी का दिन इसलिए चुना गया क्योंकि 26 जनवरी 1930 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अधिवेशन में अंग्रेजों से पूर्ण स्वराज का प्रस्ताव पास हुआ था। इसलिए 26 जनवरी का दिन भारत का संविधान लागू करने के लिए चुना गया। गणतंत्र को प्रजातंत्र, लोकतंत्र या जनतंत्र भी कहते हैं यानि यहां प्रजा यानी लोगों का शासन होता है। इस दिन हमे भी देश सेवा, प्रगति और तरक्की के योगदान के बारे में कदम उठाने चाहिए और इनपर अम करना चाहिए।

भारत में हर साल 26 जनवरी को मनाया जाता है। ये 2018 में हमारा 69th गणतंत्र दिवस समारोह हैं।

शतरंज और सांप सीढ़ी भारत की ही खोज़ है और यहीं नहीं भारत ने ही विश्व को कलन, त्रिकोणमिति और बीज़ गणित का अध्यन दिया है।

गणतंत्र दिवस को उस दिन को याद करने के लिए मनाया जाता है जब जनवरी 1950 को भारत का संविधान लागू हुआ था।

जहाँ एक ओर भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है तो दूसरी तरफ विश्व सातवां सबसे बड़ा देश है।

भारत को अंग्रेजी में इंडिया कहा जाता है जो भारत की ही एक नदी इंडस के नाम पर पड़ा है।

Republic day गाँधी जयंती  के साथ भारत के सबसे महत्त्वपूर्ण राष्ट्रीय त्योहारों (national festivals) में से एक हैं।

भारत के राष्ट्रपति नई दिल्ली में ध्वज की मेजबानी करते है।

पहला गणतंत्र 1950 में मनाया गया था। पूर्व राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद ने प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के साथ ध्वज की मेजबानी की थी।

विभिन्न स्कूलों के बच्चे विभिन्न नृत्य कार्यक्रम संचालित करते है और भारत के राष्ट्रपति के समक्ष अपनी प्रतिभा दिखाते हैं।

इस दिन भारत का संविधान इसके बिना तैयार किया गया था कानून, लोकतंत्र, नागरिक अधिकार संभव नहीं होंगे।

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